Shantidut "शांतिदूत" क्या है ?

शांतिदूत (shantidut) शुरू करने का मकसद एकदम सरल है। “इंसानी प्रवृत्ति में आया जानवरो जैसा बदलाव” यह ब्लॉग का मूल आधार होगा। इस ब्लॉग में हमारी बुनियादी “शिक्षा”(Education),”सेहत”(Health)”,”बेरोजगारी”(Unemployment),”आर्थिक”(Financial) जैसे विषयो पे चर्चा होगी। 

“विज्ञानं “(Science)  “प्रौद्योगिकी”(Technology), विषयों का मानव जीवन पर जो असर पड़ा है। इन सब के फायदे और भविष्य में उसके हमें क्या परिणाम भुगतने होंगे। भविष्य में होनेवाले परिणामो से बचने क लिए हम क्या कर सकते है और हमें क्या करना चाहिए। 

इंसान को इंसान की पहचान कराना। इंसान को इंसान से मिलाना। इत्यादि मेरे (Shantidut)ब्लॉग के विषय होंगे। मुझे आशा है कि इस इंसानियत की ओर बढ़ते हुए कदमो से कदम मिला के आप मेरा साथ देंगे।

शांतिदूत (Shantidut)आपको एहसास कराना चाहता है

कल का इंसान कैसा था ?

जब इंसान ने धरती पर अपने कदम रखे, उस वक्त वह एक सामाजिक प्राणी था। अर्थात वह अन्य इंसानो के साथ समूह  में रहता था।  दो वक्त का खाना, रहने को कोई गुफा और शरीर की रक्षा हेतु शरीर ढकने की कुछ वस्तुए, बस इतनी जरूरते थी। इसके आलावा शारीरिक जरुरत को छोड़ दिया जाये, तो इन उंगलियों पर गिनी जा सकने वाली जरूरतों से इंसान पूरी जिंदगी गुजार लेता था। यही इंसान की असली पहचान हुआ करती थी।

आज का इंसान कैसा है ?

देखते ही देखते गुफाओ में रहने वाले सीधे साधे इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है। कि वह सामाजिक प्राणी से सामजिक जानवर बन गया।  प्रौद्योगिकी और विज्ञान की सहायता से आज इंसान ने बोहोत तरक्की की है।  रोटी कपडा और मकान इन जरूरतों के आलावा कुछ बुनियादी जरूरतों जैसे शिक्षा, सेहत इत्यादि  को छोड़ दिया जाये उसकी जरूरते असीमित होते जा रही है। इन सब को पूरा करने के लिए वह इंसान से जानवर बन चूका है। 

कल का इंसान कैसा होगा ?

इंसान की आज की परिस्थितियाँ देख के कोई भी आसानी से अंदाजा लगा सकता है, कि आनेवाले भविष्य में वह किस कदर सामाजिक जानवर से सामाजिक शैतान बन जायेगा। अगर इसी तरह से वो आगे बढ़ता रहा तो उसकी असीमित अनुपयोगी जरूरते और उसकी बेहिसाब तरक्की ही उसे दुनिया से धीरे धीरे मिटा देगी। इतना ही नहीं इंसान खुद के साथ साथ अन्य पशु पक्षियों और अन्य प्राणियों का भी अस्तित्व मिटा देगा।  

शांतिदूत (Shantidut) का मुख्य उद्देश्य

आइये थोड़ी समझदारी रखते है, इंसान बन के इंसान के लिए कुछ करते हैI

हम आज जो भी है हमारे भूतकाल में किये गए कर्मो की वजह से है।  इस लिए सर्वप्रथम हमें ये जान ने की आवश्यकता है के अच्छे कर्म या बुरे कर्म का मतलब क्या है ?  आज की दुनिया में कर्म का सही मायने में मतलब क्या होना चाहिए ?  हम भी आज की दुनिया में कर्म का मतलब समझ कर अपने अच्छे कर्मो से आज के इस सामाजिक जानवर को पुनः सामाजिक प्राणी बना पाएंगे। और भविष्य को सुरक्षित रख पाएंगे। 

इंसान को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करना ,यही शांतिदूत (Shantidut)का मुख्य उद्देश्य है।   

मेरे ब्लॉग के विषय

(Categories)"श्रेणियाँ"

कुछ सवाल अपनी रूह से मै भी कर के देखु ,
सुना है यह सब्र से बच्चो सा जवाब देती है।

क्या आज हम जो कर रहे है वो सही है ? हमारा  भविष्य सुरक्षित है? क्या हमारी आने वाली पीढ़ी सुरक्षित है? जिस तरह इंसान के स्वभाव में तेजी से जानवरो जैसे बदलाव आ रहे है। आखिर उसकी वजह क्या है? क्या इस बात के लिए प्रद्योगिकी “Technology” जिम्मेदार है ? जैसे कंप्यूटर, मोबाइल ? विज्ञानं “Science ” जिम्मेदार है? या इंसानी अन्धविश्वास “Superstition”? या हमारी कमजोर हो चुकी बुनियादी शिक्षा “Education” ?

             ऐसे कुछ सवाल है जो मैं अपने ब्लॉग के माध्यम से आपके साथ साझा “Share” करना चाहता हूँ। और कुछ सवाल आपसे भी लेना चाहता हूँ। ता के हम सब मिल के भविष्य में आनेवाली सारी परशानियों की जड़ को ही समाप्त कर सके।

 जवाब भी जरूर मिलेगा तुझे तेरे करम का।
कुछ जवाब वक्त भी इम्तिहान से देता है।

           आज इंसान जिस परिस्थिति से गुजर रहा है वह अत्यंत भयावह है, झगड़े, फसाद, मारा-मारी, स्वार्थ, लूट, बेरोज़गारी, हत्या, इन जैसी बाते इंसान क लिए रोजमर्रा के जिंदगी जैसे है….जीने की होड़ में  इंसान इतना क्रूर और निष्ठुर हो गया है की उसे अच्छे बुरे में अंतर समझ सकने की ताकत नहीं रही। कैसे हम अपने स्वाभाव में थोडासा बदलाव ला कर इस दुनिया को फिर से स्वर्ग बना सकते है।  कैसे विज्ञानं, प्रद्योगिकी, शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण हथियारों का फूलो जैसा सही और सटीक उपयोग कर, इंसान को दिखाई न देने वाली वर्त्तमान परिस्थिति का अहसास दिलाया जा सकता है। निःसंदेह आगे आनेवाले भविष्य को उज्वल और सुरक्षित बनाना हमारी अपनी जिम्मेदारी है। वरना आनेवाली  हमारी निरपराध पीढ़ी हमारे कर्मो की सजा भुगतेगी…. इन सभी विषयो पर गहराई से चर्चा करना और आम इंसान को भविष्य आनेवाले संकट से अवगत करना शांतिदूत का मुख्य उद्देश्य है।

क्या आप शांति पूर्ण मार्ग पर "शांतिदूत" (Shantidut) के साथ चलना चाहते है ?
तो आप शांतिदूत को पढ़े और कुछ आप भी लिखे और अपनी राय अवश्य दे।